The State of Chhattisgarh is known as rice bowl of India and follows a rich tradition of food culture .The Food preparation falls in different categories . Most of the traditional and tribe foods are made by rice and rice flour , curd(number of veg kadis) and variety of leaves like lal bhaji,chech bhaji ,kohda , bohar bhaji. Badi and Bijori are optional food categories also Gulgula ,pidiya ,dhoodh fara,balooshahi ,khurmi falls in sweet categories.

Jai Sai Baba

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Tuesday, January 17, 2017

Balooshahi/बालूशाही

balooshahi-Chhattisgarh recipes/Chhattisgarhi sweets
Ingredients : maida ,ghee or dalda for moyan,curd,1/2 spoon baking soda, water
Take maida ,ghee for moyan,1/2 spoon baking soda ,1-2 spoon curd , and luke warm water in small quantity.

Now mix all the ingredient and knead it gently  .Leave the  dough for some time and mix them again .

Now make small round balls out of the dough and press them gently between your palms and make a depression with your thumb on the centre.

Take ghee or dalda in a pan and heat it .Once its proper heated, start deep fry those flat balls in ghee in medium flame.
Once all flat balls are deep fried, It is turn to make sugar syrup. 

Take equal amount of water and sugar in a pan and start boiling it .Slowly once its concentrated .Take a drop of it between thumb and index finger ,if 1-2 strings started coming then switch off the flame.
Pour all the sugar syrup on the fried balls and leave it for few hours. The syrup will settle down and balls will soak in the syrup. Balooshahi is ready to eat.

Note : balooshahi is famous and available everywhere in Chhattisgarh .Its source of energy and sweetness.

सबसे पहले मैदा लेकर उसमें मोयन के लिए घी,१-२ स्पून चमच्च दही और १/२ चमच्च खाने का सोडा मिलाएं।  अब आवश्यकता अनुसार गुनगुना पानी उसमें थोड़ी मात्रा में डाल कर मैदे को मुलायम गूँथ लें।  गुंथे हुए आते को थोड़े देर छोड़ दें।  अब आटे की गोल लोई बनाये और दोनों हथेलियों  के बीच हल्के से  दबा कर चपटा करें और बीच में अंगूठे की मदद से थोड़ा दबा कर गहरा करें। अब कड़ाई में घी या डालडा  लेकर गरम करें और तेल के गरम होने पर लोइयों को हलके आंच में  तल लें।  
एक दूसरे बर्तन में सामान मात्रा में पानी और शक्कर मिला  कर चासनी बनाने के लिए गरम करे।  थोड़े देर बाद उँगलियों के बीच चासनी की एक बूँद ले कर देख लें की १ तार बनाने लग गया हो।  अब चासनी की आंच को बंद करे और चासनी को तले हुए लोइयों के ऊपर डाल कर सूखने के लिए छोड़ दें।  कुछ घंटो बाद आप चासनी की  परत लोइयों के ऊपर देख सकेंगे। बालूशाही तैयार है।

टिप्पणी: बालूशाही छत्तीसगढ़ में  बहुत प्रसिद्ध  मिठाई है और लगभग सभी भागो में मिलती और खायी जाती है। यह ताकत और स्वाद से भरपूर होती है https://www.blogger.com/blogger.g?balooshahiblogID=1569510334211418747#editor/target=post;postID=3256786727662175601;onPublishedMenu=allposts;onClosedMenu=allposts;postNum=1;src=link

Wednesday, January 4, 2017

Futu (long mushroom)/फुटु

Image result for long mushroom
futu/long mushroom-Chhattisgarh recipes
 
Ingredients :Futu (long mushroom seasonal or available button mushroom),onions, salt,turmeric powder,red chili powder ,coriander powder

Soak the mushroom in the water for  some time.Wash it thoroughly .Now with the help of your hand finger tear the long mushroom thread wise and once its done, cut in long pcs.

Fine chop 2-3 onions .

futu/long mushroom-Chhattisgarh traditional recipes
Heat 2-3 spoon oil in a Pan n saute onion first . Add salt,turmeric powder,red chili powder ,coriander powder in onion and mix the chopped futu(mushroom) in it .
 
Cover the preparation and let it cook .slowly water comes out from mushroom.Cook it until all the water evaporate n mushroom turns dry .Switch off the flame n enjoy with chapati or rice .
 
 
Note: Most of us are aware about mushroom & its nutritional values. Now days its grown up commercially & most of them are button mushrooms.From the ages in Chhattisgarh people are consuming mushroom and locally it is known as futu. In Chhattisgarh consumption of  long mushroom is high, which is self grown in the forest near the roots of shady big tree .Now a days it comes only for few days &  price goes upto 400rs/kg.
 
छत्तीसगढ़ में बारिश के समय लंबे फुटु या मशरुम खाने का प्रचलन है। फुटु को  पानी में डूबा कर थोड़ी देर छोड़ दें ।  अब इसे अच्छी तरह से धो लें और हाथों की उँगलियों की सहायता से लंबे फुटु के तारों को अलग करते जाएँ। जब सारे फुटु को अच्छे तरह से तारों को अलग करके काट लें।  अब ३-४ प्याज़ को लंबे और पतले तरीके से काट लें। एक कड़ाई में तेल गरम करें और प्याज़ को भुनाने के लिए डालें।  जब प्याज़ थोड़ा भूरा हो जाए तब उसमें नमक ,हल्दी पाउडर,मिर्ची पाउडर,धनिया पाउडर डाल कर भुने और कटे फुटु को दाल कर अच्छे से डांक कर मिलकर पकाएं  थोड़ी देर बाद फुटु से पानी निकलने लगेगा और इसे तब तक पकने दें जब तक फुटु सुख न जाए। अब फुटु खाने के लिए तैयार है। इसे रोटी  चांवल के साथ परोसा जा  सकता है। 
टिपण्णी : हम सभी मुशरूम के स्वास्थ्यकारक गुण से परिचित हैं।  इन दिनों बड़े पैमाने पर  उगाया जा रहा है । पारंपरिक तौर पर छत्तीसगढ़ में लंबे मशरुम जिसे फुटु भी कहा जाता है खाया जाता है। यह मौशमी है और जंगलों में  बड़े पेड़ों की छाँव में उगता है। मौसम में इसकी मांग बहुत होती है कीमत ४००/किलो  तक जाता है। 

Tuesday, January 3, 2017

Boda/बोड़ा


Boda is a root & eaten mainly in bastar (southern part of Chhattisgarh) .The preparation is little tedious.
 
Boda/बोड़ा-Chhattisgarh recipes- traditional veg preparation
Ingredients : Boda,onion,ginger garlic paste ,tomato paste, water, oil, salt, turmeric, chili powder, coriander powder

Boda is taken out inside from the earth .so it is covered completely with soil.

Soak in water & wash many times the outer layer. Now pel off the out cover & collect the inner round shape part. On requirement basis you can cut into two parts.

Grind or fine chop 2-3 onions ,take  garlic paste or fine chop garlic cloves, prepare tomato paste.

Heat the oil a pan n put onion garlic paste in it .once paste start changing the color mix tomato paste in it. Cook the paste for some time until water evaporate .Now add salt, turmeric, chili powder, coriander powder and cook until oil comes in the sides. Add boda in it,mix with  coocked paste  and cover for some time. After  5-10 mins add some hot water and transfer whole mixture in the cooker. Switch off the flame after 3-4 Whistles.One can enjoy it with steamed rice or ghee roti.
 
 : Boda is nod like structure which is grown on its roots .Its rich in minerals & carbs .Mostly found in forest.It is popular in bastar and near by region.
 
पहले बोड़ा  को अच्छी  तरह से पानी में धो लें।  फिर उसके ऊपरी मिटटी वाले परत को निकाल लें। और अंदर के गोल हिस्से को २ टुकड़ों में काट लें।  अब २-३ प्याज़ ले कर या तो बारीक़ काट ले या फिर पीस लें।  अब एक कड़ाई में तेल गरम करें और उसमें प्याज़ का पेस्ट डाल के भुने १/२ चमच्च लहसून अदरक का पेस्ट डालें और भुने। थोड़ा भून जाने पर टमाटर का पेस्ट डाल दें और अच्छे से भुने जब मसाले से तेल ऊपर आने लगे तब नमक ,हल्दी पाउडर,धनिया पाउडर ,मिर्ची पाउडर फिर थोड़ी देर भून लें।  अब इसमें बोड़ा  डाल  कर अच्छे से मिलाएं और डांक कर पकने दें।  थोड़ी देर बाद ढक्कन खोलें और गरम पानी डाल कर अच्छे से मिलाएं और एक उबाल आने तक पकने दें। अब गैस बंद करें और इसे कुकर में डाल कर ३-४ सिटी दें।  थोड़ी देर बाद कुकर खोलें और गर्म चांवल के साथ बोड़ा का मज़ा लें।
टिपण्णी : बोड़ा सामान्यतः जंगलों में पाया जाता है। यह गाँठ जैसी रचना खनिज लवण से भरपूर और कार्बोहायड्रेट से भरपूर होती है।यह छत्तीसगढ़ के बस्तर और आस पास की जगहों में ज्यादातर खाया जाता है।  
 
 
 

Monday, January 2, 2017

Karil(bamboo shoot)/करील

karil is fine chopped or grated bamboo shoot .

Take 250gm karil  and wash it 2-3 times. Take 2 onions & chop it  in long pcs.

Heat the oil in a pan.Put chopped onion in it ,let it get little brown & add the karil in it .cover the mixture to cook well.

Once its little cooked then add salt,red chili powder, coriander powder, turmeric powder and cover it.

After  5-8 mins open the cover and mix them well . sprinkle fine chopped coriander in it.switch off the flame.  धनिया 

Note : Karil is grated bamboo shot .Its eaten mostly in bastar & near by districts.Bamboo is great food for nutrition specially non agricultural days or time when survival is tough.

करील बारीक़ घिसा हुआ बांस का तना  होता है। उसे पहले अच्छे से धो लीजिये।  अब २-३ प्याज़ अच्छे से काट लें।  एक कड़ाई में तेल डाल कर  गरम करें और कटे प्याज़ को डाल कर भुने और थोड़ा भूरा होने दें। थोड़े देर बाद करील डालें और डक कर पकने दें।  थोड़ी देर बाद जब करील थोड पक जाए तब नमक,लाल मिर्च ,धनिया पाउडर ,हल्दी पाउडर डालें और अच्छे से मिला कर फिर से डांक दें और पकने दें।  थोड़ी देर बाद गैस बंद करें और ऊपर से थोड़ी कटी  धनिया डाल दें। 

टिपण्णी : करील जो की बांस का तना होता है और सामान्यतः छत्तीसगढ़ के बस्तर और आस पास के क्षेत्र में खाया जाता है। बांस बहुत ही पौष्टिक होता और जिन दिनों खेती नहीं होती या फिर अकाल के समय बांस शक्ति स्त्रोत के रूप में काम करता है।