The State of Chhattisgarh is known as rice bowl of India and follows a rich tradition of food culture .The Food preparation falls in different categories . Most of the traditional and tribe foods are made by rice and rice flour , curd(number of veg kadis) and variety of leaves like lal bhaji,chech bhaji ,kohda , bohar bhaji. Badi and Bijori are optional food categories also Gulgula ,pidiya ,dhoodh fara,balooshahi ,khurmi falls in sweet categories.

Jai Sai Baba

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Friday, October 23, 2020

Traditional Dussehra Celebration and Food in Chhattisgarh

नवरात्रि का दसवां दिन विजयदशमी या दशहरे के रूप में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में यूँ तो इसे राम जी के रावण पर विजय प्राप्ति के रूप  में मनाया जाता है ,पर हर एक अलग अलग  क्षेत्रों में इसकी मान्यता व् मनाने के तरीकों में अंतर है।  

ज्यादातर दशहरे के दिन  सभी बड़े एवं पुरुष सदस्य स्नान उपरांत घर के कुल देवी देवताओं की पूजा करते है ,कई जगह ये पूजा गीले वस्त्र  पहन कर की जाती है। साथ ही  सभी तरह के हथियारों ,औजारों ,बही खातों की पूजा की जाती है। प्रसाद के रूप में मीठे एवं नमकीन घी  में बने रोठ व् नारियल चढ़ाया जाता है। 


भोजन में पूड़ी,बड़ा,भजिया ,दही बड़ा  जैसे विशेष भोज केले के पत्ते में परोसे जाते हैं। शाम को एक दूसरे को सोन पत्ते (पत्र)का आदान प्रदान किया जाता है। 




जिस तरह राम जी के रावण विजय पश्चात् अभिनन्दन हुआ था उसी तरह रावण दहन पश्चात् घर लौटने पर बड़ी बुजुर्ग महिलाएं घर के पुरुषों एवंम बच्चों का तिलक लगा अभिनन्दन करती है ,और दशहरे को  विजय दिवस के रूप में दर्शाती करती है।  

दशहरे के दिन नीलकंठ का दर्शन शुभ माना जाता है। 

प्रायतः नवरात्रि के नौ दिनों तक छत्तीसगढ़ के ग्रामीण एवं कुछ शहरी अंचल में रामलीला होती है व् दसवें (दशहरे )  दिन रावण वध के साथ  इसकी समाप्ति होती है। 

बस्तर का दशहरा  : बस्तर का विश्व प्रसिद्द दशहरा माँ दंतेश्वरी को समर्पित है। माँ दंतेश्वरी माँ दुर्गा का महिषासुर मर्दिनी का रूप माना जाता है।  बस्तर का दशहरा पर्व 75 दिनों तक चलने  वाला एक सबसे लम्बा त्यौहार है। बस्तर के राज परिवार और आदिवासी जनता के माँ दन्तेश्वरी और भगवान जगन्नाथ के प्रति आस्था का प्रतीक दशहरा मनाया जाता है।यहाँ रावण दहन की परंपरा नहीं की जाती। जिसमें सभी ग्राम और वन  देवताओं को आमंत्रित  जाता है ,साथ ही प्रसिद्द रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है  , जिसे गोंचा पर्व कहा जाता है। गोंचा  एक तरह का गोल हरा फल होता है ,जिसे बांस से बने छोटे तोप जिसे तुपकी  कहा जाता है ,में भर कर चलाया जाता है। 

बस्तर दशहरा में काली (छिलके)वाली उड़द दाल का बड़ा ,सल्फी,लांदा (fermented rice ) का प्रयोग दिखता है। 


सरगुजा का दशहरा : सरगुजा (अंबिकापुर) में भी दशहरा मनाया जाता है ,जो कि सालों से राजपरिवार द्वारा आयोजित किया जाता रहा है। इस दिन राजकीय महल आम जनता  के लिए खुला होता है।अस्त्र शास्त्रों एवंम वाद्ययंत्रों की पूजा की जाती है।  सरगुजा के लखनपुर में दशहरे के एक दिन बाद रावण दहन होता है। इसी तरह कुछ क्षेत्रों में गंगा दशहरा के रूप में ५ दिनों का पर्व व् मेला होता है ,जो कि गंगा नदी के उद्भव से जुड़ा हुआ है। 

बड़ों  आशीर्वाद लेने के साथ साथ साथ पान खाने  की परंपरा भी है। 


जशपुर का दशहरा : जशपुर का दशहरा 27 पीढ़ियों से राजपरिवार द्वारा आयोजित किया जाता है। भगवान बालाजी एवं माता काली को समर्पित दशहरा उत्सव ,राजकीय परिवार के साथ साथ सभी बैगा ,पुजारिओं एवं आदिवासी जनजाति के लोग एक साथ मनाते हैं। दशहरे के दिन पूजा 800  साल पुराने काली मदिर में की जाती है।  यहाँ बकरे की बलि की परंपरा है।    

कोरवा जनजाति एवमं समुदाय द्वारा किये जाने वाले माँ खुड़िया रानी की  पूजा का विशेष महत्तव है। 

सारंगढ़ का दशहरा : अन्य जगहों के दशहरे से अलग सारंगढ़ में दशहरे के दिन गढ़ विच्छेदन की २०० साल पुरानी  परम्परा का आयोजन राज परिवार द्वारा किया जाता है। गढ़ विच्छेदन सैनिकों एवं वीरों के उत्साह वर्धन के लिए बनाई गयी विधा है।    



Wednesday, October 14, 2020

Sabudana Khichadi Recipe -Sago Recipe

Sabudana /Sago (tapioca pearls) is very famous and healthy recipe in Chhattisgarh as well as across India. It is traditionally used during fast or vrat.

Sabudane ki Khichadi 









Sabudana /Sago (tapioca pearls) recipe Ingredients :

Sabudana -250 grams

Boil potato- 2

Groundnut -fistfull 

Cumin seeds - 1 to 2 tablespoons

Curry leaves

Red or green chillies -2

Chopped Coriander leaves -1 small bowl


Chhattisgarh Recipes Sabhudana Khichadi :


  • Take 250 grams of sabudana and soak it overnight. 

Ingredients for sabudana Recipe


  • Take 2 boil potatoes, mash it and mix with sabudana.
  • Also sprinkle some black or sendha salt and mix it well. Sprinkle some coriander leaves.

Sabudana for Fasting



  • Take a pan and heat 4-5 small spoons of oil.
  • Once the oil is hot enough, then fry groundnuts.
  • Add cumin seeds ,curry leaves and chilies.

easy Sabudana Recipe


  • Now transfer the mixture of sabudana and mashed potatoes in the pan.
  • Blend well all the ingredients together. 
  • Now cover the lid and cook for another 2 minutes.
  • Now open the lid and check the consistency of sabudana ,which is nicely cooked.
  • Here we can add little more salt as per taste , add lemon juice to enhance the taste of sabudana khichadi .

  • Sprinkle chopped coriander leaves and serve it hot.
Sabudana for Vrat



Note : Sabudana is very nutritious and provides necessary calories .It is a perfect breakfast or good option for dinner.

Full Video Of Sabudana Khichadi 


साबूदाने की खिचड़ी बनाने के लिए सबसे पहले 250 ग्राम साबूदाना को रात भर थोड़े पानी में भीगा कर रखिए।सुबह फूले हुए साबूदाना में 2 उबले आलू मैश करके मिलाएं साथ ही सेंधा नमक या फिर काला नमक डालकर एक दूसरे के साथ अच्छी तरह से मिला ले और थोड़ा हरा काटा धनिया भी इसमें डाल ले।कढ़ाई में तेल गर्म करें तेल के गर्म होने पर उसमें मूंगफली के दानों को डालें मूंगफली के दाने तल जने परउसमें जीरा करी पत्ता, हरि या लाल कटी मिर्च डालें। आप तैयार किए हुए साबूदाना और उबले आलू के मिश्रण को तेल में डालें और मूंगफली और जीरे के साथ अच्छे से मिला ले। थोड़ा ढक कर पकने दें। 2 मिनट के बाद ढक्कन खोलें, साबूदाना अच्छी तरीके से पक चुका होगा।थोड़ा नमक अपने स्वादानुसार छिड़क लें। साबूदाना को परोसने से पहले नींबू के रस डालें और साथ ही हरी धनिया ऊपर से डालकर परोसे।

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Thursday, October 8, 2020

Navaratri festival-Fasting and Prasad(day-wise)

 नवरात्रि : नवरात्रि हिन्दुओं का  पर्व है ,जो नौ  दिनों तक चलता  है। साल में ४ बार नवरात्रि आती है ,जिसमें से शारदे एवं चैत्र नवरात्र को विशेष माना जाता है। 

मां दुर्गा को शक्ति स्वरूप माना जाता है और इनके नौ अलग अलग रूपों को नौ दिनों तक पूजा जाता है।हर रूप की महत्ता और मान्यता अलग अलग है ।

नवरात्रि के नव दिन मनुष्य के आत्म चिंतन एवं मनन के दृष्टी से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जिसमें आंतरिक ऊर्जा का स्थांतरण अलग अलग आंतरिक चक्रों से होता हुआ ,मनुष्य की प्रवृति को रज ,तम से सद गुण (क्रोध, अहंकार से शांत चित्त) की ओर ले जाती है ।

हर दिन के प्रसाद/ भोग एवं वस्त्रों के रंग नव देवियों के पसंद अनुसार विशेष होते हैं ।

Navratri special celebrations, list of prasad and dress code



    



पहला दिन : पहला दिन माँ शैलपुत्री का होता है जो शैल (पर्वत) की पुत्री हैं। माँ शैलपुत्री को पार्वती ,सती ,हेमवती के नाम से भी  जाना जाता है।  दुखों को हरने वाली और निरोगी रखने वाली माता को नवरात्रि  के प्रथम  दिन घी का भोग लगाया जाता है। 

घी बनाने की  सम्पूर्ण विधि 


Ghee- Navratri Day 1 Prasad/Bhog


दूसरा दिन : नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित  होता है ,ब्रह्मचारिणी का अर्थ है जो ब्रह्मचर्य का आचरण करे। माँ के तपस्विनी रूप की पूजा की जाती है।इस दिन समस्त सिद्धि ,तप और सयंम की प्राप्ति होती है।ब्रह्मचर्य को विद्यार्थी रूप में देखा जाता है ,यह दिन ज्ञान ,एकाग्रता,लक्ष्य ,इच्छाशक्ति  की कामना को पूर्ण करता है. 

माता को शक्कर या मिश्री भोग के रूप में चढाई जाती है। 

Sugar/Shakkar-Navratri Day 2 Prasad/Bhog


तीसरा दिन : नवरात्रि  का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा का होता है।  मस्तक पर घंटे के आकार का चन्द्रमा धारण होने के कारण  चंद्रघंटा   कहा जाता है।  शांत और विनम्रता लिए हुए माँ की काया सभी तरह के भय ,डर और कष्टों को दूर करती है ,और वीरता ,पराक्रम एवं निर्भयता प्रदान करते हैं।  

माँ चंद्रघंटा को दूध या दूध से बने पकवान का भोग लगाया जाता है। 

Doodh/Milk-Navratri Day 3 Prasad/Bhog


 चौथा दिन : नवरात्रि का चौथा दिन माँ कुष्मांडा का होता है।  कु का अर्थ है छोटा ,ऊष्मा का अर्थ ऊर्जा या शक्ति , अंड का अर्थ ब्रह्माण्ड (cosmic energy ) . माता कूष्माण्डा को ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति  बहुत सरलता से करने वाली  वाली माना  जाता है।  संस्कृत में कुष्मांड का अर्थ कद्दू /कुम्हड़ा होता है ,जो की एक छोटे गोलाकार सरचना  के अंदर अपनी पूरी ऊर्जा समेटे हुए होता है।  माता को सफ़ेद कुम्हड़ा (रखिये ) की बलि भी पसंद है। माँ सुख, धन , बल प्रदान करने वाली और निरोग बनाने वाली होती है। 

इस दिन माँ कुष्मांडा को मालपुए का भोग चढ़ाया जाता है। 

Maalpue-Navratri Day 4 Prasad/Bhog


पांचवा दिन : नवरात्रि का पांचवा दिन माँ स्कंदमाता का होता है। स्कन्द (कार्तिकेय) बाल्यावस्था में माता की गोद  में बैठे होने के कारण माँ के इस रूप को स्कंदमाता कहा जाता है। स्कंदमाता मोक्ष ,सुख ,समृद्धि  एवं प्रसिद्धि प्रदान करने वाली होती है। 

माँ स्कंदमाता को केले का प्रसाद चढ़ाया जाता है।  

Banana/Kela-Navratri Day 5 Prasad/Bhog


छठवां दिन : नवरात्रि का छठवां दिन माँ कात्यायनी का होता है,जो की देवी पार्वती सबसे उग्र रूप हैं । ऋषि कात्यायन को पुत्री रूप में प्राप्त होने के कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा।  देवों के क्रोध से उत्पन्न देवी ने अपने उग्र स्वरुप  में महिषासुर का वध किया था।  देवी का ध्यान करने वाले को भय ,संताप,दुःख से मुक्ति मिलती है साथ ही शक्ति एवंम साहस का अनुभव होता है। कात्यायनी अमोघ व्रत विवाह विलम्ब एवमं बाधा दूर करने वाला होता है। 

देवी कात्यायनी को शहद (honey ) का प्रसाद चढ़ाया जाता है। 

Honey/Shahad-Navratri Day 6 Prasad/Bhog


सांतवा दिन : नवरात्रि का सातवां दिन देवी कालरात्रि की पूजा का  होता है। इन्हे काली,महाकाली,रुद्राणी,चंडिका नाम से भी जाना जाता है ,और ये महाभयंकर ,उग्र रूप धारिणी देवी पार्वती का स्वरुप है। कालरात्रि देवी उपासना सभी तरह के भय ,ग्रह बाधाओं और नाकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला होता है। देवी का रंग रात्रि की तरह काला होता है और बाल बिखरे होते है,इन्हे रात्रि की नियन्त्रा के रूप में जाना जाता है। 

देवी कालरात्रि को गुड़ का प्रसाद चढ़ाया जाता है।  

Gud-Navratri Day 7 Prasad/Bhog


आठवां दिन : नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी का पूजन होता है।  गौरवर्ण (श्वेत ) और अति कांतिमयी होने के कारण इन्हे महागौरी की उपमा दी जाती है।  देवी का यह स्वरूप सुन्दर ,करूणामयी,शांत और स्नेह से भरा हुआ, सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला होता है। 

माता महागौरी को नारियल का भोग अतिप्रिय होता है।     

Nariyal/Coconut-Navratri Day 8 Prasad/Bhog


नवां दिन : नवरात्रि का नवां दिन माँ सिद्धिदात्री का होता है। जिस तरह शिव जी ने सभी सिद्धियों को प्राप्त किया एवं अर्धनारीश्वर रूप में माँ सिद्धिदात्री को प्राप्त किया।  माँ सिद्धिदात्री सभी आठों सिद्धियों को प्रदान करने वाली,रोग शोक से मुक्त करने वाली  एवं सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली होती है।मानव के अलावा देव,यक्ष ,असूर ,ऋषि सभी सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। 

माता सिद्धिदात्री को तिल का भोग लगाया जाता है। 

Til/Sesame -Navratri Day 9 Prasad/Bhog


नवरात्रि का दसवां  विजयदश्मी कहलाता है जिसका अर्थ है , दसवें दिन में मिली हुई विजय (Triumph on 10th day), जिसका अपना बड़ा महत्त्व है।  आयुध पूजा या सरस्वती पूजा भी की जाती है। 

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Wednesday, September 23, 2020

Maize Crop in Chhattisgarh


Corn / Maize / jondhari



Corn / Maize / Jondhari:

The present days sweetcorn or corn is also known as Jondhari in Chhattisgarh,this word is getting extinct slowly. In Chhattisgarh,Maize is always grown in the fields or on the muddy divider of 2 fields. This is mostly harvested in rainy season.Maize is considered as heavy grains, which is very nutritious. Mize seeds are used in making bread out of its flour, popcorn or Coarsely grinded seeds are used as daliya .

Maize is known as "Queen of all cereals". In Chhattisgarh production of Maize has increased gradually. Due to increase in commercial consumptions farmers are growing it as cash crop. Earlier, it used to be harvested in rainy season with paddy crop but now farmers are growing it across the year .

It was grown by tribes since very olden times and still most of the production comes from the tribal belt example- Bastar,Kanker,Kondagaon,Dantewada region as well as some part of Sarguja district like Koria ,Balarampur,Surajpur.


After Paddy ,Maize is the most important crop in Chhattisgarh .The commercial demand gives a bright chance to increase the production. The production units have been set up for processing of Maize starch , Glucose, Maize oil, Gluten, Maize fodder/Husk, Conflakes. From very long time the farmers are  exporting Maize from Chhattisgarh to many other countries out side India.     



भुट्टा/मक्का/जोंधरी 


भुट्टा/मक्का/जोंधरी :

वर्तमान के sweetcorn या मक्के को छत्तीसगढ़ी में जोंधरी भी कहा जाता है ,जो कि एक लुप्त होता हुआ शब्द है। छत्तीसगढ़ में  खेतों की मेड़ों या बाड़ियों में  हमेशा से ही लगाया जाता है।इसे ज्यादातर बारिश में लगाया जाता है ।इसे भारी अनाज के रूप में देखा जाता है ,जो बहुत पौष्टिक होता है । भुट्टे के आटे की रोटी, घिस कर दलिये की तरह या लाई की तरह फोड़ कर प्रयोग होता है।





#MaizeinChhattisgarh

#ImporatanceofcorninChhattisgarh

#Bhuttautpadan

#Makkekekheti


Monday, September 14, 2020

Poi Bhaji Recipe-पोइ भाजी -Malabar Spinach Recipe

How can I cook Poi saag at home
पोइ भाजी - Poi Leaves -Malabar Spinach



Ingredient: 

Poi Leaves (Malabar Spinach)-1 bundle

Garlic cloves-4-5

Onion -1

Tomato -1 

Split Gram lentils -little/one fist

Red chilies -2-3

Salt - As per taste

Water, 

Oil

Watch Full Recipe Poi Chana Dal Recipe :





Chhattisgarh Recipes Poi Bhaji Chana Dal (Malabar Spinach )

Soak a fistful Chana Dal (gram lentil).

Take a bundle of Poi leaves (Malabar Spinach ).Pluck the leaves and wash them .  

Cut the leaves in fine pieces.

Take 4-5 chopped garlic cloves and Cut them in small pieces.

Also cut 1 tomato in pieces.


How to eat Poi
Ingredients for Poi Bhaji 


Lets heat 2 small spoons of edible oil in a pan .

Add chopped garlic, red chilies (1-2), Chopped onion and gram lentils (soaked in water for 10 minutes) in the hot oil .Cover and cook for 1 minute.

lets learn How to cook Malabar Spinach
Malabar Spinach Recipe


Now,transfer all the chopped Poi leaves (Malabar spinach) and spread the half a tea spoon salt above it,cover and cook it for 10 mins in medium flame.The chopped poi leaves/Bhaji are sticky in nature,so adding little water can be completely an option.

Poi Saag Recipe with Chana dal ,most nutritious leaves
Benefits of Poi


Once leaves are cooked and soft, add tomato pieces and let it cook for few secs.

Poi Benefits
Cooked Poi Leaves


When ,water become starts vaporizing from the pan, mix the leaves well and cook it for  2-5 min more, until poi leaves becomes dry .

Poi leaves are ready to serve with hot rice and daal.

Health Benefits & Nutrient Value : In Chhattisgarh, the dish of Malabar Spinach leaves are very healthy and full of minerals .This leaves are beneficial for the growing children and complete the additional requirements of nutrients in the body .

Calcium

Iron - 55 mg

Vit A

Vit C

 सबसे पहले पोइ के पत्तों को अच्छी तरह से धोएँ,और पत्तों को बारीक काट लें। अब एक कड़ाई में तेल गरम करें।  उसमें लहसुन के कटे हुए टुकड़े , लाल मिर्च, और १० मिनट पहले भीगी हुई चने की दाल को डाल  दे ,और ढँक  कर १ मिनट के लिए पकने दें। पोइ के कटे पत्तों को डालें औरआधा चम्मच नमक छिड़क कर ढक्कन लगा कर पकने दें । पोइ की पत्तियां थोड़ी चिपकने वाली और लसलसी होती है ,ज़रुरत पड़ने पर ही थोड़ा पानी डालें। 

थोड़ी देर बाद भाजी में से पानी बहार आने लगेगा और १० मिनट तक मद्धम आंच में  पूरा वाष्पीकृत को जाएगा। फिर टमाटर के कटे हुए टुकड़ों को मिला कर पकने दें, उसके बाद भाजी को अच्छे से  मिलाएं  और  पुरे  उड़ाते तक सूखा कर पकाएं।  अब गैस बंद कर दे।  गरमा गर्म भाजी को  चांवल के साथ परोसे।

पोइ भाजी 
गोल पत्तों और मोटे बेलों वाली ये भाजी प्रयातः पुरे विश्व में खायी जाती है। छत्तीसगढ़ में भी यह लगभग हर घर या घरों के आस पास देखने को मिलती है। पत्तों के साथ साथ इनकी मुलायम बेलों को भी पकाया जाता है। इसे Malabar Spinach ,Vine Spinach के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बहुत ही ताकतवर पत्तियां है जो बढ़ते बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। 

Friday, September 4, 2020

पितृपक्ष महत्व,विधि एवं व्यंजन

How to do Pitrupaksha Puja 

 

  
                                                                     

"श्रद्धया इदं श्राद्धम "

जो श्रद्धा से किया गया हो ,वही श्राद्ध है। 

माता - पिता एवं अन्य परिवार के पूर्वजों की तृप्ति के लिए जो श्रद्धा पूर्वक कार्य किया जाये ,वह श्राद के रूप में जाना जाता है । भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावश्या के सोलह दिनों तक पूर्वजो की सेवा को पितृपक्ष के रूप में जाना जाता है।   

माता -पिता एवं पूर्वजों की स्मृति हमेशा बनाये रखने के उद्देश्य से श्राद जैसे नियमों  की विवेचना की गयी है। शास्त्रों के अनुसार मृत्यु पश्चात् आत्मा का विस्तृत एवं वैज्ञानिक व्याख्यान बताया गया है। अश्विन कृष्ण  प्रतिपदा से अमावश्या तक ब्रह्माण्ड ऊर्जा के साथ पितृप्राण पृथ्वी पर रहते हैं। कहा जाता है ,भौतिक शरीर के त्याग पश्चात् भी आत्मा में मोह, माया ,भूख  और प्यास जैसे भावों का अंश रह जाता है। 

हमारी भारतीय संस्कृति में  मनुष्य पर पितृ ऋण ,देव ऋण एवं ऋषि ऋण माने गए हैं ,जिसमें पितृ ऋण का स्थान सर्वोपरि है।  

पितृ ऋण में पिता के अतितिक्त माता एवं सभी पूर्वज जो हमें जीवन देने एवं इसके विकास में अपना सहयोग देते है ,सम्मिलित होते हैं।  पितृ पक्ष में तीन से लेकर अधिकतम पीढ़ियों तक के पिता एवं माता दोनों ही ओर के पितरों (पूर्वजों ) का तर्पण किया जाता है। 


तर्पण की विधि :

तर्पण  संस्कृत के  "तृप"  शब्द से उद्भव हुआ है,जिसका अर्थ है तृप्ति या संतुष्टि। देवताओं या पूर्वजो को श्रद्धा पूर्वक पवित्र जल का अर्पण, जो उन्हें तृप्त करता है।  

पितृपक्ष के प्रथम दिन सभी पितरों (पूर्वजों )का आह्वान किया जाता है। जिसके लिए सुबह स्नानादि दिनचर्या उपरान्त ,पूर्व दिशा में पूजा विधि की जाती है।  

तर्पण सामग्री :

तर्पण के लिए कांसे ,ताम्बे या चांदी के पात्रों (बर्तन ) का प्रयोग होता है। गंगा जल (न होने पर साफ़ पानी ),काली तिल ,चांवल, जौं ,कांसी/दरबा  घास और बिना या कम सुगंध वाले फूल, धातु के सिक्के , चन्दन पाउडर, जनेव की ज़रुरत होती है। कोसी या कुश घास की ४अंगूठी तर्पण के लिए पहनी जाती है।   

पूजा की जगह पर चांवल के आटे की रंगोली (चौक) बनाया जाता है।  

कांसी (कोसी )घास को पूर्वजों के प्रतीक रूप में देखा जाता है।  आप जितने वंशो के पूर्वजो का आह्वान करते हैं उनके लिए , ४ फ़ीट के बराबर टुकड़े ले कर एक बड़े प्लेट, केले की पत्ती या पानी के पात्र में थोड़ी थोड़ी दूर में रखें। चन्दन का टीका लगाया जाता है। फूलों और जनेव को चढ़ाया जाता है। 

आचमन एवं गणेश वंदना पश्चात् सीधे हाथ में साबुत चांवल (अक्षत) ,तिल  में थोड़ा जल छिड़क कर संकल्पना  की जाती है। कोसी की घास में पानी समर्पित करते हुए आह्वान (welcome ) किया जाता है, साथ की पूर्वजों एवं मृत माता पिता से सुख ,समृद्धि ,आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है। कहा जाता है कि तिल पितरों एवं देवताओं को पसंद होता है ,इसलिए तिल वाले जल को पुरे घर में छिड़का जाता है। 

ज्यादातर  स्वर्गीय पिता का श्राद अष्ठमी के दिन ,माता एवंम महिला पूर्वजो का श्राद नवमी को किया जाता है।  

रंगोली या चौक पर कंडे या छेने  को रखा जाता है ,और होम देने के साथ गृह शुद्धिकरण की विधि की जाती है। 

सर्व पितृ अमावश्या 


पितृ पक्ष के भोग (भोजन ):


Food in Pitrupaksha 

पितृ पक्ष में पितरों (पूर्वजों )के पसंद का सात्विक भोजन बना कर अर्पण किया जाता है। छत्तीसगढ़ में भोग के लिए ज्यादातर इन व्यंजनों  तैयार किये जाते हैं ,जो सात्विक एवं कम मसालों से बने हो। 

चांवल 

चौसेला (चांवल आटे  से बने व्यंजन ),

पूरी,

खीर 

उड़द दाल का बड़ा ,

इड़हर  या कोई दही की कढ़ी 

अनरसा 

गुलगुला 

भजिया 

जिमीकंद 


प्रसाद एवं भोजन 





भोग के साथ साथ भोजन के ४  छोटे छोटे दोने तैयार किये जाते है ,पहले हिस्से को होम (आग) में डाला जाता है,दूसरे हिस्से को कौंवे को ,बाकि के २ हिस्सों को कुत्ते और गाय को खिलाया जाता है।  साथ की ब्राह्मणो को भी अन्न एवं तिल दान किया जाता है।  
अलग अलग प्राणियों के हिस्से 


शुरू के चार दिन परिवार ,रिश्तेदार एवं पडोसी एक दूसरे को भोजन आमंत्रण देने के साथ साथ ,पितरो के लिए बने विशेष भोजन को आपस में बाँट कर खाते हैं। 

सर्व पितृ अमावस्या :

पूर्णिमा से शुरू होकर १६ वे दिन सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितृ पक्ष समाप्त होता है।  इस दिन सभी पूर्वजों एवं पितरों जिनकी पुण्य तिथि ज्ञात न हो ,या पुरे पितृपक्ष के दिनों में तर्पण न हुआ हो ,उन सभी पितरों से क्षमायाचना एवं सुख, समृद्धि केआशीर्वाद की प्रार्थना की  जाती है।  

इसे महालया ,बड़मावस्या या दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। इसका सार जीवन चक्र केअस्थायी होने के सत्य  और उसके महत्ता के प्रति आभार दर्शाता  है। 


Tuesday, August 25, 2020

कच्चे पपीते की सब्जी - Raw Papaya Recipe















Ingredients :

Raw Papaya -1 (small or medium size)

Chopped Onion -1

Chopped Garlic -4-5 cloves

Chopped Tomato -1 (or Mango Powder)

Mustard Seeds -1/2 table spoons 

Jeera Seeds - 1/2 table spoons 

Methi Seeds -1/2 table spoons 

Salt as per taste ,

Turmeric powder -1/2 table spoons

 Red chili powder -1/2 table spoons

Coriander powder -1/2 table spoons 


Watch Full recipe of Kaccha Papita (Raw Papaya) here :



Chhattisgarh Recipes Raw Papaya (Kacche papite ki sabji)

1. Take raw papaya and wash it .Peel the upper green layer of it .

Recipe for unripe papaya
Raw Papaya


2. Cut it from the middle.Inside may contain lots of white seeds on the white thick pad.

3. Remove the seeds and clean it from inside .And cut the raw Papaya in small pieces.

Here is the look of raw papaya from the inside with the seeds
Raw Papaya with seeds


4. The other ingredients required for the Raw Papaya recipe are 1 long chopped onion,chopped garlic cloves as well as 1 chopped tomato or use dry mango powder.

5. For tempering (Tadka) take mustard seeds, Jeera seeds,Methi seeds,Curry leaves,Red chilies.

Traditional Chhattisgarh Recipe for Raw Papaya
Ingredients for Raw Papaya Recipe


6. Take a pan and heat 3-4 table spoons of edible oil .

7.Once oil is hot add mustard seeds, Jeera seeds and Methi seeds.  curry leaves,red chilies.Now add garlic pieces and chopped onion.

8. Once Onion turns little brown add raw Papaya pieces in it add mix well .Cover the lid and cook further for 5 minutes in slow to medium flame.

Here is the very easy recipe of Raw Papaya /Kaccha Papita
Raw Papaya Recipe


9. Open the lid and check whether papaya become cooked and little soft .

10 Add Salt as per taste ,1/2 table spoons of  turmeric powder, 1/2 table spoons red chili powder,1/2 table spoons coriander powder and blend all ingredients nicely .Cover once again and cook it for 2-4 minutes.

11. If you find papaya pieces becomes sticky on the base of the pan ,then add very little water in it to prevent from the sticking.

12. Open the lid ,nice aroma starts coming.It is the time to add tomato pieces or mango powder in it .Cook for little more time.

Papaya is super healthy ,gluten free and a vegan dish to eat .
Kachhe papite ki sabji 


13.Press the Papaya pieces to check the softness. Garnish with chopped coriander leaves.Raw papaya recipe is ready to serve .

Note : This Chhattisgarh Recipe of Unripe Papaya is very nutritious and healthy. It is very good for digestive health,eyes and skin. Traditionally this raw papaya recipe is given to lactating mothers. Raw papaya is very good antioxidant and full of good enzymes. 

कच्चे पपीते की सब्जी बनाने के लिए एक मध्यम  या छोटे आकर का पपीता लें।  उसे धो कर छील लें।  पपीते को जब काटेंगे तब सफ़ेद बीज निकालेंगे , इन बीजों को बाहर निकाल कर सफ़ेद सतह को काट कर बहार निकाल ले।  अब पपीते को छोटे टुकड़ों में काट ले। 

एक कड़ाई में तेल गरम करेंऔर तड़के के  लिए जीरा, सरसों और मेथी के डालें। कटे लहसून के टुकड़े, लाल मिर्च ,मीठा नीम पत्ता डालें। अब प्याज़ के टुकड़ों को डालें और सुनहरा होने तक भुने। इसके बाद इसमें पपीते के टुकड़ों को डालें और अच्छी तरह मिला लें और ढंक कर पकने के लिए ५ मिनट छोड़ें। 

अब ढक्कन खोले पपीता थोड़ा पका हुआ होगा तब नमक स्वादानुसार , मिर्च पाउडर ,हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर डाल कर अच्छे से मिलकर फिर २ मिनट मध्यम आंच पर ढांक कर पकाएं। अब पपीते के साथ टमाटर के कटे टुकड़े या अमचूर डाल कर पकाएं।  

अब गैस बंद करें और कच्चे पपीते  की सब्जी तैयार है।